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जानें कà¥â€à¤¯à¤¾ है सिसà¥à¤Ÿ
अकà¥à¤¸à¤° आपने सà¥à¤¨à¤¾ होगा कि किसी को बà¥à¤°à¥€ तरह खांसी आती थी। इसके साथ छाती में दरà¥à¤¦ होता था व खांसी में खून à¤à¥€ आता था। किसी डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह पर छाती का à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¥‡ करवाया तो फेफड़े में सिसà¥à¤Ÿ यानी कीड़े वाला टà¥à¤¯à¥‚मर पाया गया। जब सिसà¥à¤Ÿ में लीक हà¥à¤† और तरल पदारà¥à¤¥ सांस की नली में पहà¥à¤‚चा, वैसे ही लगातार खांसी का दौर और इसके साथ खून के छींटे आना शà¥à¤°à¥‚ हो गà¤à¥¤
कैसे पहà¥à¤‚चता है सिसà¥à¤Ÿ शरीर में
देश में गंदगी, कीचड़ व नालों की à¤à¤°à¤®à¤¾à¤° है। यहां खà¥à¤²à¥‡ आम मल मूतà¥à¤° व कचड़ा जमीन पर पड़ा रहता है। कà¥à¤¤à¥à¤¤à¥‡ à¤à¤¸à¥€ जगहों में अपना मल विसरà¥à¤œà¤¿à¤¤ करते हैं। इस कारण जमीन के अलावा वातावरण à¤à¥€ दूषित होता है। कहने का मतलब यह है कि मिटà¥à¤Ÿà¥€, पानी व हवा में इस कीड़े (इकाइनोकोकस गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¸) के अंडों की à¤à¤°à¤®à¤¾à¤° है।
देश में इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ गंदी जगहों पर खोमचे वाले, चाट वाले, फलों का रस निकालने वाले, à¤à¥‡à¤²à¤ªà¥à¤°à¥€ बेचने वाले लाइन लगाकर खड़े होते हैं। जाहिर है, à¤à¤¸à¥‡ खà¥à¤²à¥‡ वातावरण में बिकने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का हवा व पानी के जरिठपà¥à¤°à¤¦à¥‚षित होना तय है। इसमें कोई शक नहीं कि जब आप परिवार या मितà¥à¤°à¥‹à¤‚ के साथ बाहर निकलेंगे, तो à¤à¤²à¤¾ इन खà¥à¤²à¥‡ आसमान में सड़कों के किनारे हवा के à¤à¥‹à¤‚कों से टकराते इन लà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¥‡ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ फासà¥à¤Ÿ फूडà¥à¤¸ का लà¥à¤¤à¥à¤« उठाने का मन बना सकते हैं। गरà¥à¤®à¤¾à¤—रà¥à¤® मसालेदार खाना जब आपके पेट में पहà¥à¤‚चेगा तो वह अकेला तो नहीं होगा बलà¥à¤•ि अपने साथ सिसà¥à¤Ÿ बनाने वाले अंडे à¤à¥€ समेटे होगा। आपको पता ही नहीं चलेगा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ये कीड़े के अंडे इतने बारीक होते हैं कि आंख से दिखते ही नहीं हैं।
फेफडे़ में मौजूदगी
पेट में अंडे पहà¥à¤‚चने के बाद उसके अंदर का कीड़ा बाहर निकल आता है और आंत की दीवार को छेदकर आंतों में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ खून की नलियों के जरिठलिवर में पहà¥à¤‚च जाता है और वहां से फिर शरीर के अनà¥à¤¯ अंगों की ओर बॠजाता है। शरीर में पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से यह लिवर और फेफड़े में अपना सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ पड़ाव डाल लेता है। अपने पड़ाव पर पहà¥à¤‚च कर यह बà¥à¤¨à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ कर देता है और अपने चारों ओर à¤à¤• कवच का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ कर हाइडेटिड सिसà¥à¤Ÿ को जनà¥à¤® देता है और यह धीरे-धीरे आकार में बà¥à¤¨à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ कर देता है।
इस तरह पहचानें
अगर कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ या बचà¥à¤šà¤¾ गली में पाठजाने वाले आवारा कà¥à¤¤à¥à¤¤à¥‡ के साथ खेलता है या फिर इसे सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ करता है तो à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सिसà¥à¤Ÿ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ होने का खतरा बॠजाता है। या इसके अलावा आपने घर पर जो कà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¾ पाल रखा है, उसे न तो नियमित इंजेकà¥à¤¶à¤¨ लगते हों और न ही उसकी समà¥à¤šà¤¿à¤¤ सफाई का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जाता हो, तो à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में फेफड़े के सिसà¥à¤Ÿ होने का खतरा बॠजाता है।
इसके अलावा अगर आप खांसी, बलगम, सीने में दरà¥à¤¦, इसà¥à¤¨à¥‹à¤«à¥€à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हैं और कà¤à¥€-कà¤à¥€ खांसी के साथ खून à¤à¥€ आ जाता है तो संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ हो सकती है कि आप फेफड़े के सिसà¥à¤Ÿ रोग से पीड़ित हों। अगर पेट के दाहिने हिसà¥à¤¸à¥‡ में दरà¥à¤¦ होता है और उसी हिसà¥à¤¸à¥‡ में गांठà¤à¥€ मालूम पड़ती है तो हो सकता है कि लिवर में सिसà¥à¤Ÿ हो।
अगर इलाज न कराया जाà¤à¤‚
अगर फेफड़े की सिसà¥à¤Ÿ का इलाज ही न करवाà¤à¤‚ तो देर- सवेर मरीज की मौत होने का खतरा बॠजाता है। फेफड़े के सिसà¥à¤Ÿ रोग से पीड़ित मरीज को किसी अनà¥à¤à¤µà¥€ थोरेसिक सरà¥à¤œà¤¨ से परामरà¥à¤¶ लेना चाहिठऔर उनकी निगरानी में जलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ इलाज शà¥à¤°à¥‚ करवाना चाहिà¤, अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾ फेफड़े की सिसà¥à¤Ÿ के फट जाने पर पीड़ित मरीज को गंà¤à¥€à¤° परिणाम à¤à¥à¤—तने पड़ सकते हैं।
जांचें
छाती का à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¥‡ सिसà¥à¤Ÿ की मौजूदगी को पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ करने वाली सबसे ससà¥à¤¤à¥€ व सरल जांच है। इसके अलावा सिसà¥à¤Ÿ का आकार, उसकी मौजूदगी का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ और इलाज का निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने के लिठअनà¥à¤¯ आधà¥à¤¨à¤¿à¤• जांचें जैसे छाती का मलà¥à¤Ÿà¥€ सà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¡ सी.टी. सà¥à¤•ैन और à¤à¤®.आर.आई. की जरूरत पड़ती है।
इलाज के बारे में
सिसà¥à¤Ÿ के इलाज के निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ में कई बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना पड़ता है। जैसे सिसà¥à¤Ÿ का आकार, छाती के अंदर उसका मौजूद रहना और मरीज की शारीरिक अवसà¥à¤¥à¤¾à¥¤ फेफड़े की सिसà¥à¤Ÿ का सबसे उतà¥à¤¤à¤® और कारगर इलाज ऑपरेशन ही है। सिसà¥à¤Ÿ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ मरीज को जितनी जलà¥à¤¦à¥€ हो सके ऑपरेशन के जरिठफेफड़े की सिसà¥à¤Ÿ को निकलवा देना चाहिà¤, अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾ सिसà¥à¤Ÿ के फट जाने पर जानलेवा जटिलताà¤à¤‚ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती हैं। इस तरह के ऑपरेशन के लिठà¤à¤• अनà¥à¤à¤µà¥€ थोरेसिक सरà¥à¤œà¤¨ का होना बहà¥à¤¤ जरूरी है। हालांकि अतà¥à¤¯à¤¾à¤§à¥à¤¨à¤¿à¤• तकनीक व सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤“ं के फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प ऑपरेशन में सफलता मिलने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• हो जाती है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ ऑपरेशन के बजाय सà¥à¤ˆ डालकर फेफड़े के सिसà¥à¤Ÿ का पानी निकालकर उसमें दवाई डाली जाती है पर यह सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ इलाज नहीं है।
कà¥à¤¯à¤¾ है मरà¥à¤œ
शरीर के अंदर पाई जाने वाली सिसà¥à¤Ÿ को मेडिकल à¤à¤¾à¤·à¤¾ में, ‘हाइडेटिड सिसà¥à¤Ÿâ€™ के नाम से जाना जाता है। यह सिसà¥à¤Ÿ à¤à¤• विशेष पà¥à¤°à¤•ार के कीड़े का अंडा होता है, जिस पर कवच चà¥à¤¾ होता है और यह अंडा शरीर के जिस à¤à¥€ अंग में पहà¥à¤‚चता है, वहां धीरे-धीरे आकार में बड़ा होना शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है। à¤à¤¸à¥‡ सिसà¥à¤Ÿ शरीर के अंदर सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फेफड़े में पाठजाते हैं या फिर लिवर में। à¤à¤¸à¤¾ सिसà¥à¤Ÿ मानव शरीर के अनà¥à¤¯ अंगों में à¤à¥€ पाया जा सकता है। जैसे दिमाग, दिल, हाथ व पैर की मांसपेशियों आदि में।
इस तरह के सिसà¥à¤Ÿ के अंडों को जनà¥à¤® देने वाले कीड़े को मेडिकल à¤à¤¾à¤·à¤¾ में ‘इकाइनोकोकस गà¥à¤°à¥ˆà¤¨à¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¸â€™ कहा जाता है। यह सिरà¥à¤« पांच मिलीमीटर लंबा होता है। यह कीड़ा मनà¥à¤·à¥à¤¯ के शरीर में निवास न करके कà¥à¤¤à¥à¤¤à¥‡ की आंतों में रहता है और इस कीड़े की जीवन अवधि सिरà¥à¤« पांच महीने से लेकर तकरीबन दो साल तक होती है। अपनी इस जीवन यातà¥à¤°à¤¾ में यह कà¥à¤¤à¥à¤¤à¥‡ की आंतों से निकलने वाले मल के जरिठलाखों की संखà¥à¤¯à¤¾ में अंडे धरती की मिटà¥à¤Ÿà¥€ में पहà¥à¤‚चा चà¥à¤•ा होता है।
इन सà¥à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ पर करें अमल
कà¤à¥€ à¤à¥€ हाथ साफ किठबगैर खाना न खाà¤à¤‚।
अगर आप के घर में पालतू कà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¾ है तो उसे नियमित अंतराल पर टीके लगवाà¤à¤‚। अगर आप कà¥à¤¤à¥à¤¤à¥‡ से खेल रहे हों या उसे सà¥à¤µà¤¯à¤‚ खाना खिला रहे हों तो इसके बाद हाथों को जीवाणà¥à¤¨à¤¾à¤¶à¤• साबà¥à¤¨ से अवशà¥à¤¯ धो लें।
कà¤à¥€ à¤à¥€ मांसाहारी à¤à¥‹à¤œà¤¨ सड़कों के किनारे सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ ढाबों में न करें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤¸à¥‡ अनेक ढाबों में बगैर जांच किया हà¥à¤† पकने वाला मांस सिसà¥à¤Ÿ को आपके पेट में पहà¥à¤‚चाने का सबसे बड़ा जरिया है। हमेशा मांस या गोशà¥à¤¤ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ व सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚डरà¥à¤¡ दà¥à¤•ानों से ही खरीदें।
नाखूनों को नियमित रूप से काटें।
दूषित माहौल में सिसà¥à¤Ÿ नामक रोग के होने का खतरा बॠजाता है। अगर आप सड़कों के किनारे असà¥à¤µà¤šà¥à¤› सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर बिकने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ जैसे चाट, à¤à¥‡à¤²à¤ªà¥à¤°à¥€, छोले à¤à¤Ÿà¥‚रे, व चाऊमीन आदि नहीं खाते हैं और सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ रखते हैं, तो सिसà¥à¤Ÿ खासकर फेफड़े के सिसà¥à¤Ÿ की बीमारी से दूर रह सकते हैं...
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